इतिहास

प्राचीन काल में यहाँ बामदेव ऋषि का निवास स्थान था | कहा जाता है कि बाम्बेस्वर पर्वत में उनका आश्रम आज भी बना हुआ है। बामदेव ऋषि के नाम पर ही बाँदा का नाम पहले बामदेवपुरी,और बाद में बाँदा कहलाया जाने लगा |
बाँदा जिला भगवान नीलकण्ठ एवं देवर्षि बामदेव की स्मृतियों से जुड़ा धार्मिक जिला है। यह अनेक महापुरुषों की जन्म स्थली एवं कर्म भूमि रही है। बाँदा एक ऐतिहासिक नगर है।जिसका वर्णन प्रचीन ग्रंथों में भी मिलता है।
क्षेत्रफल-बाँदा जनपद से चित्रकूट अलग जिला बन जाने के कारण अब बाँदा जनपद का क्षेत्रफल 4112 वर्ग किलोमीटर रह गया है।
बांदा से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित बुंदेलखंड की शान कहे जाने वाला ‘भूरागढ़ किला है। केन नदी के पास खड़ा यह भूरागढ़ का किला बुंदेली राजाओं की निशानी है। यह किला सत्रह सौ छियालीस सदी का है। इस किले का इतिहास इसे बलिदान, देशभक्ति और समानता का प्रतीक मनाता है।
सीमाएँ-बाँदा जनपद के उत्तर में फतेहपुर दक्षिण में छतरपुर,पन्ना,सतना(म.प्र.) स्थित है। पूरब में जिला-चित्रकूट धाम एवं रीवाँ,मध्यप्रदेश स्थित है। पश्चिम में महोबा,हमीरपुर जिला इसकी राजनैतिक सीमा निर्धारित करते हैं।
विस्तार-विस्तार की दृष्टि से बाँदा जनपद उत्तर से दक्षिण 108 किलोमीटर चौड़ा है।यह पूरब में भरत कूप पश्चिम में मटौंध उत्तर में चन्दवारा यमुना नदी तथा दक्षिण में कलिंजर तक फैला है।इसका क्षेत्रफल लगभग 4112 वर्ग किलोमीटर है।
प्राकृतिक रचना-बाँदा को प्राकृतिक बनावट के अनुसार दो भागों में बाँट सकते हैं।
1.केन के पास का पश्चिमी भाग
2.मध्य का समतल मैदान।
1.केन के पास का पश्चिमी भाग-केन नदी के आसपास तथा पश्चिम की ओर कालीमार भूमि पायी जाती है।यह मिट्टी फसल उपज के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है।इस भाग में अधिकतर बाँदा तहसील का हिस्सा आता है।
2.मध्य का समतल मैदान-इस भाग में बवेरू.अतर्रा,व नरैनी तहसीले आती हैं।यहां का अधिकतर भाग समतल है।केवल छोटी नदियों व नालों के किनारे ही ऊंचा नीचा है।समतल होने के कारण नहरों से सिंचाई होती है।इस क्षेत्र में अधिकतर काबर व मार मिट्टी पायी जाती है।इस क्षेत्र में धान की फसल अधिक होती है।
बाँदा जनपद की मिट्टी-हमारे जनपद में तीन प्रकार की मिट्टी पायी जाती है-
1.मार
2.काबर
3.पडुवा(राकड)।
वनस्पतियां- जनपद में पर्णपाती वन झाड़-झांखड़,कटिली झाड़ियां घास प्रमुख रूप से पायी जाती है।
पर्वत- बाँदा जनपद में प्रमुख रूप से बाम्बेश्वर,खत्री पहाड़,रामचंद्र,सिंघल्ला,कालिंजर व रसिन पर्वत पाये जाते हैं।
नदियाँ- बाँदा जनपद में प्रमुख रूप से केन नदी,यमुना नदी,बागै नदी,चन्द्रावलि नदी,गड़रा नदी ये प्रमुख नदियाँ हैं।